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जीवित भगवान के काव्य का सारांश क्या है?

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 जीवित भगवान की कविता का सारांश क्या है? "आदिकाल से ही मनुष्य ईश्वर की खोज करता रहा है। भिन्न भिन्न धर्मों में ईश्वर को खोजने की अलग-अलग प्रक्रिया बताई गई है। इसी प्रकार हिंदू धर्म में ईश्वर से मिलने के लिए ।निम्नलिखित व्यवस्था बनाई गई है 1, योग साधना 2, आध्यात्मिक साधना 3, कठोर हट योग साधना 4, ध्यान समाधि इन चारों  व्यवस्था को हम पोस्ट के अंतिम भाग में पढ़ेंगे..... आइए अब जानते हैं, जीवित भगवान के काव्य का सारांश क्या है? भागवत गीता के अनुसार ईश्वर का कोई रूप नहीं है, किंतु ईश्वर ब्रह्मांड के एक छोर से दूसरे छोर तक हर वस्तु में विराजमान है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार ब्रह्मांड के समय को चार भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार है.... (सतयुग, द्वापर युग, त्रेता युग, कलयुग,) समय के इस कालचक्र को, इन चार युगों में समावेश किया गया है. जो समय की माला के चार मनके हैं,  इन चार युगों का समय निश्चित किया गया है,! वर्तमान में कलयुग चल रहा है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार , हर युग में ईश्वर का अवतार निश्चित है। "सतयुग में ईश्वर का अवतार, सतयुग में ईश्वर ने 4 अवतार लिए थे जो इस प्र...

गांधीवादी सिद्धांतों पर चलने का मेरा वास्तविक अनुभव क्या है?

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 गांधीवादी  सिद्धांतों  पर चलने का आपका  वास्तविक अनुभव क्या है? आपका सवाल वास्तव में उच्च  कोटि का  है। सबसे पहले हम जानेंगे कि गांधीवादी सिद्धांत  क्या है? गांधीवादी सिद्धांत एक दो धारी तलवार की तरह है जिसका मुख्य उद्देश्य सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के अनुसार समाज को बदलना है! " वैसेे तो मोहनदास करमचंद गांधी" (महात्मा गांधी जी) सत्य और अहिंसा के पुजारी थे लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह बातें भी सुनी जाती है. कि महात्मा गांधी ने ही सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत का पहला प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया. कहते हैं कि राजनीतिक षड्यंत्र के कारण सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रधानमंत्री पद से वंचित होना पड़ा. कुछ लोग मानते हैं कि इस षड्यंत्र का श्रेय केवल और केवल महात्मा गांधी जी को ही जाता है. "महात्मा गांधी जी का कहना था कि अहिंसा परमो धर्म" अनुवाद: अहिंसा मनुष्य का परम धर्म।   कभी भी किसी प्रकार की हिंसा नहीं करनी चाहिए यही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। लकिन उन्होंने कभी पूरा श्लोक नहीं बोला  ।क्यों  नहीं  बोला यह तो मुझे नहीं पता लेकिन अग...

क्षेत्रीय कार्य पर मेरा अनुभव (मानव संवेदना)

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यह भी पढ़ें..... श्रम ब्यूरो में काम करने का अनुभव  My experience on field work (human compassion) अगर आप ऐसा अनुभव करते कि आप "मानव संवेदना से रहित है! तो हो सकता है आप किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो। आज मैं जो आपको बताने जा रहा हूं!मुझे नहीं पता यह मेरा अनुभव है या मेरी "मानव संवेदना "है क्योंकि कहीं पर भी इंसानियत के नियमों का उल्लंघन होता है। मैं वहीं से सोचना शुरु कर देता हूं। एक बहुत बड़ी मिठाई की दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगी हुई थी। सेठ जी को  हा.  हु. कहने की भी फुर्सत नहीं थी "मैं भी उसी दुकान पर आया था क्योंकि मुझे 1 किलो रसगुल्ले लेने  थे ।  उसी  दुकान में         कुछ लोग पीछे कुर्सियों पर बैठे समोसा कचोरी खा रहे थे। उनमें से एक बोला.......... अरे समोसा गरम लाओ भाई. तो सेठ जी एकदम से पलटते हुए. (छोटू से बोलते हैं जो कि उसी दुकान में काम करता है. और मुझे लगता है कि शायद वह बिहार से था) सेठ जी"अबे साले तुझे बार-बार कहना पड़ता है क्या! तुझे समझ में नहीं आता समोसा गरम करके देना है ? छोटू"नजरे झुकाते हुए'सेठ जी मैंने समोसे ...

श्रम ब्यूरो में काम करने का अनुभव

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 श्रम कि जानकारी Working experience in labour Bureau श्रम ब्यूरो क्या है श्रम ब्यूरो को"श्रम एवं रोजगार  मंत्रालय को मिलाकर  बनाया  गया  है! और इसके  अध्यक्ष महानिदेशक  है!  श्रम ब्यूरो  की दो शाखा चंडीगढ़  तथा  शिमला  में  स्थित  है! इसके अलावा  कोलकाता  .कानपुर  .अहमदाबाद .तथा  चेन्नई  में  इसके  चार क्षेत्रीय  कार्यालय है! तथा  मुंबई  में  उप क्षेत्रीय  कार्यालय है। श्रम ब्यूरो"आंकड़ों  की  सटीक  सामग्री. संग्रहण. प्रकाशन तथा मजदूरी लाभ. उत्पादकता. अनुपस्थिति. कार्य जगत उद्योग संबधो. कार्यकारी  एवं  निर्वाह  स्थितियों से संबंधित  सूचना  तथा  विभिन्न  श्रम अधिनियमो  को लागू करना और मूल्यांकन करना! इत्यादि के लिए उत्तरदाई है किसानों  तथा  ग्रामीण  मजदूरों  के लिए उपभोक्ता  मूल्यो  की  सूची तैयार करना । मजदूरी  दर  की  सूची तथा संगठित एवं असंगठित  उद...

2021बाबा वेंगा कि भविष्यवाणी

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 बाबा वेंगा ने की 2021 की भविष्यवाणी जिस प्रकार से 2020 गुजरा हम सोच भी नहीं सकते कि आने वाला समय उससे भी ज्यादा खतरनाक   साबित   होगा! साल 2021 साल 2020 से भी खतरनाक साबित होगा! यह बात हम नहीं कह रहे हैं ! यह भविष्यवाणी की है बाबा वेंगा ने! बाबा बाबा वेंगा ने 100 से अधिक भविष्यवाणियां की और 80 से ज्यादा भविष्यवाणी सच साबित हुई कौन है बाबा वेंगा बाबा वेंगा का जन्म बुल्गारिया के सट्रुमिका में 31 जनवरी 1911 को हुआ था वैसे इनका पूरा नाम bengalia Pandewa ghustrewa था लेकिन प्यार से लोग इन्हें वेंगा पुकारते थे! एक तूफान में अपनी आंखें खो देने वाली बाबा वेंगा बचपन से ही बिल्कुल अकेली हो गई थी! खाने के लिए गांव वाले दे जाते उसी से गुजारा चलता था! फिर अचानक बाबा वेंगा को अपनी शक्ति का एहसास हुआ. और वह कहती थी कि आने वाला समय उन्हें दिख जाता है बाबा वेंगा अब लोगों का भविष्य देखने लगी थी! और वो जो बताती  सच हो जाता! फिर धीरे-धीरे बाबा वेंगा का प्रभाव व चमत्कार बढ़ता गया लोग उनके बताए हुए भविष्य पर शत-प्रतिशत विश्वास करने लगे बाबा वेंगा को कैसे मिला जीवन साथी बाबा वें...

नया साल मनाने की शुरुआत कब हुई थी

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 नव वर्ष जश्न कि शुरुआत.... संसार में नए साल का त्यौहार लोग अपने अपने तरीके से मनाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं ?की नव वर्ष के  जश्न  की शुरुआत कब और कैसे हुई? इस के संदर्भ में कुछ बातें प्रचलित है. जो मैं आपको यहां बताऊंगा. तो आइए जानते हैं नववर्ष की शुरुआत कब हुई थी! ।आप सभी को नव वर्ष 2021 की ढेर सारी शुभकामनाएं my experience की तरफ से। प्रचलन: ऐसा माना जाता है नववर्ष की शुरुआत आज से लगभग 4000 वर्ष पहले बेबीलोन नामक स्थान पर हुई थी! 1 जनवरी को मनाए जानेेे वाला नव वर्ष दरअसल ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है इसकी शुरुआत रोमन कैलेंडर सेेे हुई है! रोमन कैलेंडर का नया साल 1 मार्च से शुरू होता था। लेकिन रोमन के प्रसिद्ध सम्राट जूलियस सीजर में 46 वर्ष ईसा पूर्व में इस कैलेंडर में परिवर्तन किया था इसमें उन्होंने जुलाई का महीना और उसके बाद अपने भतीजे के नाम पर अगस्त का महीना जोड़ दिया था। और तब से लेकर आज तक दुनिया भर में नव वर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है। (भारतीय पंचांग के अनुसार 31 दिसंबर 2020 रात्रि 12:00 बजे के बाद वर्ष 2021 का आरंभ होगा इस दिन मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष...

प्रकृति

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 प्रकृति क्या है. पृथ्वी  पर)   जल .थल. व वायु. के अंतर्गत आने वाली सभी वस्तु ही प्रकृति है! इसको हम दो भागों में विभाजित कर सकते हैं ( प्रकृति के बारे में) 1 जीव प्रकृति.... 2 निर्जीव प्रकृति..... 1(जीव प्रकृति.) मुख्यतः तीन प्रकार की होती है! 1 जलीय जीव प्रकृति. 2 थलीय जीव प्रकृति. 3 आकाशय जीव प्रकृति. 1. जलीय जीव:  वह जीव!जो जल में विचरण करते हैं. जैसे मछली कछुआ मगरमच्छ व सारे जल में विचरण करने वाले जीव! जो प्रकृति के अंतर्गत ही आते हैं! 2.थलीय जीव प्रकृति: व जीव! जो पृथ्वी के थल पर विचरण करते हैं!(यानी जमीन पर) जैसे पशु व मनुष्य और जितने भी कीड़े मकोड़े सांप वह बाकी सारे जीव! यह भी प्रकृति के अंतर्गत ही आते हैं! 3.आकाशय जीव प्रकृति: व जीव! जो हवा में विचरण करते हैं. जैसे कि सारे पक्षी. यह भी प्रकृति के अंतर्गत ही आते हैं. 2 (निर्जीव प्रकृति.) प्रकृति की परिभाषा वैसे तो धरती की हर वस्तु प्रकृति के बंधन से मुक्त नहीं है! लेकिन प्रकृति की हर वस्तु की अपनी एक जगह होती है अपनी एक पहचान होती है! (वास्तव में निर्जीव प्रकृति ही प्रकृति का वास्तविक रूप है) जीव प्रकृत...